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जिंदगी की जंग को योद्धा बन कर जीतें|| Win  life war like a fighter Warrior#wondertips #motivationalspeaker #lifecoach #inspiration #hardwork

आधुनिक जिंदगी में प्रतिस्पर्धा, पैसा, पहचान बनाने की धुन में हम सब इतना दौड़ रहे हैं कि जीवन की सुख-चैन ही मानो खो रहा है। हम हर वक्त तनाव में रहते हैं जिसका असर सेहत पर पड़ रहा है व जिन भौतिक सुखों की लालसा में हम यह सब कर रहे हैं उसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। तनाव से शरीर पर, शरीर के विभिन्न अंगों पर जो विपरीत प्रभाव पड़ता है वह कई बीमारियों को जन्म देता है और जिस शरीर को सुख-सुविधाएं देने के लिए हम आजीवन दौड़ रहे हैं वही थक-हार साथ छोड़ता है। मन तनावग्रस्त हो किसी भी सुख का आनंद नहीं उठा पाता व मन की बैचेनी रात की नींद भी हर लेती है। देखिए कितने छोटे-छोटे तनाव आपको बैचेन कर देते हैं जिन्हें स्वयं को समझा कर नकारात्मक विचारों को दृढ़ता से दूर कर प्रसन्न रहने के लिए तनावरहित जीवन जिया जा सकता है।


(1) प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ः- हम सब सामाजिक जीवन जीते हैं। प्रतिस्पर्धा उसका एक अभिन्न हिस्सा है। एक दूसरे से स्वयं को बेहतर साबित करना एक स्वाभाविक चाह है पर यह तभी तक जायज है जब तक वह आपको मेहनत करने व उन्नति करने हेतु प्रेरणा देती है। पर जैसे ही प्रतिस्पर्धा दूसरों को नीचा दिखाने व किसी भी कीमत पर स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने के लिए रिश्तों को दांव पर लगा केवल स्वहित में होती है वह आपको तनाव ही देगी।


(2) पैसा कमाने की चाहः– पैसा जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निश्चित ही महत्वपूर्ण है। पैसा बहुत कुछ हो सकता है सब कुछ नहीं। अतः अपनी-अपनी प्रतिभा व क्षमतानुसार पैसा कमाना ही चाहिए व उसके लिए मेहनत भी करनी चाहिए लेकिन हर चीज की एक सीमा होनी चाहिए। पैसों के लिए अपना ईमान गिरवी रखना, गलत तरीके से पैसा कमाना या सारी नैतिकता के मापदंड छोड़ स्वार्थ्य के लालच में पैसे को सर्वोपरि मान उसके पीछे भागना एक न एक दिन आपकी इज्जत, मान-मर्यादा सबकुछ लूट लेता है।

क्या आप जिंदगी जी रहे है या सिर्फ वक्त काट रहे है ?

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आओ ज़रा सोचें कि ज़िन्दगी  है क्या? क्या मात्र जीने का नाम ही ज़िंदगी है? वह  तो पशु, पक्षी, कीट, पतंगे  आदि भी जीते हैं. उनके साथ ऐसा इस लिए है क्योंकि उनमें भावनाएं नहीं हैं. इसके विपरीत हम मनुष्यों में भावनाएं हैं  जिन पर हम  जीते हैं. इसका अर्थ यह हुआ कि जिंदादिली या मुर्दादिली भावनाओं पर निर्भर है. ये हमारी भावनाएं ही हैं जो हमारी जिंदगी को खुशियों से भरपूर कर देती हैं या हमें मायूस बना देती हैं. 

ज़िंदगी ज़िंदादिली से जीने के लिए किन बातों की आवश्यकता है, उन पर विचार करें और फिर तय करें कि हम कितने ज़िंदादिल हैं और क्या ज़िंदगी हमें हर लिहाज़ से ख़ूबसूरत लगती है और हम उसका भरपूर आनंद लेते हैं. 

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