व्यवहार जीवन का अभिन्न अंग है|| Behaviour is your integral part of your Personality.

व्यवहार जीवन का अभिन्न अंग है क्योंकि इसको महसूस करते हैं आपको उस व्यक्ति की व्यक्तित्व के बारे में पूरा आभास हो जाता है।

आप अपने ऑफिस में अपने साथियों के साथ अपने जूनियर अधिकारियों के साथ कैसे बातचीत करते हैं यह आपका व्यवहार तय करता है। आपका व्यवहार खराब है तो आप सफलता के हकदार नहीं बन पाते लंबे समय के लिए।

लेकिन अगर आपका व्यवहार बहुत अच्छा है तो आपको सफलता के रास्ते से कोई हटा नहीं सकता। अपने व्यक्तित्व की छाप अपने व्यवहार से ही छोड़ सकते हैं।

 

व्यवहार करना मनुष्य के जीवन का एक अभिन्न अंग है। हमारे साथ जो भी परिस्थितियां होती हैं, उसी के अनुरूप हम व्यवहार करने लगते हैं। किसी भी व्यक्ति के व्यवहार को देखकर उसकी मानसिक स्थिति को जाना जा सकता है।

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आपके मुंह से निकला एक एक शब्द आपकी व्यवहार को जानने का सबसे बढ़िया तरीका है। इसलिए इस व्यवहार को हम अपने हिसाब से अच्छा या बुरा बना सकते हैं। जब आप सकारात्मक सोच के साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते हैं तो आप अपने आप एक अच्छे व्यवहारिक व्यक्तित्व को पेश करते हैं।

व्यापार के बारे में अगर आप जानना चाहे तो महाभारत में दुर्योधन और पांडवों का व्यवहार देख लीजिए आपको सब कुछ ध्यान आ जाएगा।

गंदे व्यवहार की वजह से दुर्योधन ने कितने लोगों को मौत के घाट उतरवा दिया इस युद्ध को करके। वरना कृष्ण भगवान शांति दूत बनकर गए थे।

इसलिए व्यवहार जीवन का अभिन्न अंग माना गया है और जितने भी सफल आदमी है 99%परसेंट अच्छे व्यवहार के कायल हैं।

अच्छे व्यवहार को पढ़ने के लिए मेरे ब्लॉग्स देखिए

 

www.wondertips777.com

https://opentextbc.ca/introductiontopsychology/chapter/11-1-personality-and-behavior-approaches-and-measurement/

  • व्यवहार हमारी उम्मीद हैं जो हम दूसरों से रखते हैं।
  • व्यवहार हमारी आदत हैं जो हम क्या हैं, बताती हैं।
  • व्यवहार हमारे शब्द हैं जो सामने वाले व्यक्ति को एक भावनात्मक रूप से, हमसे जोड़ती हैं।
  • व्यवहार हमारी शब्दावली हैं, जो हमारी ज़बान क्या हैं बतलाती हैं।
  • व्यवहार हमारी आदत हैं जो हमारी सुबह से शाम तक का,24घंटों का,7 दिन और 365/366 साल की ,दिनचर्या बतलाती हैं।
  • व्यवहार हमारी आदत हैं जो हम,हर एक छोटी-छोटी आदतों में अपनाते हैं।
  • व्यवहार हमारी आदत हैं जो हम,हर एक छोटी-छोटी आदत से सीखते हैं।
  • व्यवहार हमारी संगति हैं जिसमें हम रहते हैं।
  • व्यवहार हमारी भविष्य की संगति हैं, जिसमें हम रहना पसंद करेंगे।
  • व्यवहार हमारा संयम हैं।

 

  • व्यवहार हमारा उग्र स्वभाव हैं जो बतलाता हैं,हम हैं क्या?
  • व्यवहार हमारे हाथ हैं, जो अपनों की महत्वता बतलाते हैं।
  • व्यवहार हमारे मदद करते हाथ हैं जो अपना-पराया नहीं जानता।
  • व्यवहार हमारी सोच हैं, जो भेद नहीं करतीं।
  • व्यवहार हमारा दिमाग हैं, जो हर ओर सोचता हैं पर करता वो हैं जो हम हैं।
  • व्यवहार हमारी जिम्मेदारी हैं।
  • व्यवहार हमारी नैतिकता हैं।
  • व्यवहार हमारा चेहरा हैं,जो सभी को मुस्कुराहट के साथ मिलता हैं।
  • व्यवहार हमारा अनदेखा चेहरा हैंं,जो हमेशा मुसकुराते हुए अच्छा लिखने की कोशिश करता हैं,जो आप तक पहुच जाता हैं, निश्छल भाव से।
  • व्यवहार विश्वास हैं आपका अनदेखें चेहरे पर।

कोरोना वायरस, जो कुछ माह पूर्व तक हमारे परिवेश में कहीं दूर-दूर तक नहीं था, का प्रभाव अब हमारे जीवन का स्थाई भाव बन गया है। हमारी चर्चाओं में, हमारी कल्पनाओं में कोरोना शामिल हो चुका है। हमारी शब्दावलियां कोरोना और इससे उपजी परिस्थितियों से पटी पड़ी हैं।

 

तमाम देश समाज, जो पहले इसको कोई कारक नहीं मान रहे थे आज वे नतमस्तक हो गए हैं। दुनिया का शायद ही कोई देश हो जिसकी सामाजिक मन-स्मृति में इस वायरस को लेकर कोई नकारात्मक बात न हो। यूरोप हो या अमेरिका या विश्व पटल पर अपनी पहचान को लेकर अड़ा चीन सब इसके प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव का परिणाम भुगत रहे हैं। अब सभी राष्ट्र इस बात के लिए प्रयत्नशील हैं कि कैसे इससे बचने के लिए दवाई जल्दी से जल्दी बने।

अमेरिका, भारत और चीन सहित कई देश इस महामारी से बचने हेतु दवाई पर काम कर रहे हैं, मगर यह कार्य अभी शुरुआती दौर में है। इसलिए दवाई की खोज और उसका उत्पादन तथा उसके सभी तक पहुंचने में अभी काफी समय है। सभी राष्ट्रों में इस महामारी ने वहां की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक जीवन में परिवर्तन लाया है। इस वायरस ने अगर किसी पहलू को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वह व्यक्ति का सामाजिक पहलू है। वायरस ने व्यक्ति के समाजीकरण की गति और स्वरूप पर विशेष प्रभाव डाला है। बहुत से राष्ट्रों में समाज का व्यवहार व चरित्र दोनों बदल गए हैं।

भारत में भी पलायन के फलस्वरूप समाज के व्यवहार का परीक्षण भी हुआ और इसमें परिवर्तन भी। इस महामारी ने लोगों को घरों में कैद कर दिया है। इस कारण लोगों की उपस्थिति समाजीकरण वाले स्थानों पर नगण्य हो गई है।

इस महामारी की प्रवृत्ति लोगों को सामूहिकता की भावना से विमुख कर रही है। लगातार ‘लॉकडाउन’ के कारण लोगों के सामाजिक आयोजनों और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने की स्मृतियां भी क्षीण होने लगेंगी, क्योंकि लोगों का सार्वजनिक स्थानों पर जाना बंद या बहुत सीमित हो गया है।

एक समाज के रूप में हम अपनी कई आवश्यकताओं के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं। लोगों से मिलना, परस्पर व्यवहार और संवाद सामाजिक जीवन का अभिन्न अंग है। मगर इस बीमारी के अचानक आगमन ने इन सब प्रक्रियाओं को रोक दिया है।

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हम तकनीक, विशेष रूप से मोबाइल फोन और अन्य माध्यमों को समाज में व्यक्तिवादिता को बढ़ाने का कारक मानते थे मगर इस महामारी ने इस प्रक्रिया को सहसा बढ़ा दिया है।

 

Behavior refers to absolutely everything we do. Personality is how we as individuals tend to behave — and also think and feel — in ways that are broadly consistent over time, but maybe quite different from how a lot of other people think, feel and behave. For example, one form of behavior is speaking in public.

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