क्या आप भयंकर डिप्रेशन में तो नहीं है?

ब्लॉगर बता रहे हैं कि डिप्रेशन कुछ भी नहीं है वह सिर्फ मन की स्थिति को कंट्रोल में रखने का तरीका गलत होने पर होता है।क्या आप भयंकर डिप्रेशन में तो नहीं है? Are you in high level of depression?

कोविड संबंधी प्रतिबंधों की वजह से परिवार के सदस्यों के साथ दुख न बांट पाने या अकेले दुख सहन न कर पाने के कारण दिल्ली में ऐसे लोगों में अवसाद, चिंता, अनिद्रा और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों के मामलों में वृद्धि हुई है जो महामारी से सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के कई अस्पतालों और क्लीनिकों में आघात के बाद के तनाव से उत्पन्न होने वाली मानसिक बीमारियों से संबंधित लक्षणों की शिकायत करने वाले रोगियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

डिप्रेशन ग्रस्त एक सज्जन जब पचास साल की उम्र से ज्यादा के हुए तो उनकी पत्नी ने एक काउंसलर का अपॉइंटमेंट लिया जो ज्योतिषी भी थे।

पत्नी बोली:- “ये भयंकर डिप्रेशन में हैं, कुंडली भी देखिए इनकी।”
और बताया कि इन सब के कारण मैं भी ठीक नही हूँ।

ज्योतिषी ने कुंडली देखी सब सही पाया। अब उन्होंने काउंसलिंग शुरू की, कुछ पर्सनल बातें भी पूछी और सज्जन की पत्नी को बाहर बैठने को कहा।

सज्जन बोलते गए…
बहुत परेशान हूं…
चिंताओं से दब गया हूं…
नौकरी का प्रेशर…
बच्चों के एजूकेशन और जॉब की टेंशन…
घर का लोन, कार का लोन…
कुछ मन नही करता…
दुनिया मुझे तोप समझती है…
पर मेरे पास कारतूस जितना भी सामान नही….
मैं डिप्रेशन में हूं…
कहते हुए पूरे जीवन की किताब खोल दी।

तब विद्वान काउंसलर ने कुछ सोचा और पूछा, “दसवीं में किस स्कूल में पढ़ते थे?”

सज्जन ने उन्हें स्कूल का नाम बता दिया।

काउंसलर ने कहा:-
“आपको उस स्कूल में जाना होगा। आप वहां से आपकी दसवीं क्लास का रजिस्टर लेकर आना, अपने साथियों के नाम देखना और उन्हें ढूंढकर उनके वर्तमान हालचाल की जानकारी लेने की कोशिश करना। सारी जानकारी को डायरी में लिखना और एक माह बाद मुझे मिलना।”

सज्जन स्कूल गए, मिन्नतें कर रजिस्टर ढूँढवाया फिर उसकी कॉपी करा लाए जिसमें 120 नाम थे। महीना भर दिन-रात कोशिश की फिर भी बमुश्किल अपने 75-80 सहपाठियों के बारे में जानकारी एकत्रित कर पाए।
आश्चर्य!!!
उसमें से 20 लोग मर चुके थे…
7 विधवा/विधुर और 13 तलाकशुदा थे…
10 नशेड़ी निकले जो बात करने के भी लायक नहीं थे…
कुछ का पता ही नहीं चला कि अब वो कहां हैं…
5 इतने ग़रीब निकले की पूछो मत…
6 इतने अमीर निकले की यकीन नहीं हुआ…
कुछ केंसर ग्रस्त, कुछ लकवा, डायबिटीज़, अस्थमा या दिल के रोगी निकले…
एक दो लोग एक्सीडेंट्स में हाथ/पाँव या रीढ़ की हड्डी में चोट से बिस्तर पर थे…
कुछ के बच्चे पागल, आवारा या निकम्मे निकले…
1 जेल में था…
एक 50 की उम्र में सैटल हुआ था इसलिए अब शादी करना चाहता था, एक अभी भी सैटल नहीं था पर दो तलाक़ के बावजूद तीसरी शादी की फिराक में था…

महीने भर में दसवीं कक्षा का रजिस्टर भाग्य की व्यथा ख़ुद सुना रहा था…

काउंसलर ने पूछा:- “अब बताओ डिप्रेशन कैसा है?”

इन सज्जन को समझ आ गया कि उसे कोई बीमारी नहीं है, वो भूखा नहीं मर रहा, दिमाग एकदम सही है, कचहरी पुलिस-वकीलों से उसका पाला नही पड़ा, उसके बीवी-बच्चे बहुत अच्छे हैं, स्वस्थ हैं, वो भी स्वस्थ है, डाक्टर, अस्पताल से पाला नहीं पड़ा
सज्जन को महसूस हुआ कि दुनिया में वाकई बहुत दुख है और मैं बहुत सुखी और भाग्यशाली हूँ।

दूसरों की थाली में झाँकने की आदत छोड़ कर अपनी थाली का भोजन प्रेम से ग्रहण करें। तुलनात्मक चिन्तन न करें, सबका अपना प्रारब्ध होता है।
और फिर भी आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में हैं तो आप भी अपने स्कूल जाकर दसवीं कक्षा का रजिस्टर ले आएं और..😊..😊..

डिप्रेशन कितने दिन तक रहता है?

डिप्रेशन में आदमी क्या करें?

डिप्रेशन कितने प्रकार के होते है?

डिप्रेशन को दूर कैसे करें?

उदासी, फिर निराशा और फिर डिप्रेशन। यह छोटी-सी भावना गहरा जाए तो जानलेवा हो जाती है। भारत जैसा खुशहाली में यकीन रखने वाला देश अवसाद के मामले में नंबर दो पर आ पहुंचा है।

सचेत हो जाइए। समय रहते इससे छुटकारा पाना ही ठीक है। जितनी सतही यह समस्या लगती है, उसकी जड़ें उतनी ही गहरी बैठ जाती हैं। आज Livehindustan.com आपको बता रहा है कि कैसे आप ज़रा सी सावधानी से डिप्रेशन से मुक्ति पा सकते हैं…

क्या करता है डिप्रेशन
निराश ही तो है, कुछ दिन में अपने-आप मन बहल जाएगा। सब ठीक हो जाएगा…। हम ऐसा ही तो सोचते हैं, जब कुछ दिनों से घर-परिवार में हमें कोई चुप-चुप, अलसाया सा, चिड़चिड़ाया सा दिखता है।

हम वक्त को डॉक्टर मान कर निश्चिंत हो जाते हैं। शायद हम भी नहीं जानते कि ऐसे में क्या करना चाहिए। पता ही नहीं होता कि वह व्यक्ति मानसिक तनाव की उस दहलीज पर है, जहां से तनाव निराशा और फिर अवसाद की जहरीली बेल में तब्दील हो सकता है।

फिर ये जहरीली बेल ना सिर्फ उस शिकार मन को खोखला कर देती है, बल्कि उसके तन पर भी असर करने लगती है। अगर इसे जड़ से ना उखाड़ा जाए तो जानलेवा भी हो सकती है।


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डिप्रेशन या अवसाद ऐसी समस्‍या है जिसके बारे में कोई बात नहीं करता और यही इसके समाधान में सबसे बड़ी बाधा है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन आगाह कर चुका है कि 2020 तक डिप्रेशन दुनिया की दूसरी बड़ी बीमारी बन जाएगी। लेकिन हममें से बहुत से लोग जानते ही नहीं कि डिप्रेशन को कैसे पहचानें।

आज के कंपटीशन भरे माहौल और बदलती जीवनशैली की वजह से लोगों में डिप्रेशन यानी कि अवसाद का खतरा बढ़ता जा रहा है। जीवन की व्यस्तता के बीच डिप्रेस होना आम बात है। ऐसे लोग अक्सर लोगों से दूर भागते हैं और एकांत में रहना पसंद करते हैं।

किसी भी जगह पर उनका दिल नहीं लगता है। अवसाद के यूं तो अपने कई तरह के नुकसान हैं लेकिन हाल ही में एक शोध में यह बात भी सामने आई है कि डिप्रेशन की वजह से दिल की बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है।

अमेरिका के अमरीकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के एक जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि अवसादग्रस्त व्यक्ति में दिल की बीमारी होने का खतरा सामान्य व्यक्ति के मुकाबले तीन गुना ज्यादा होता है।

शोध के अनुसार दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों का अवसाद से ग्रस्त होना भयंकर परिणाम देने वाला हो सकता है। अमेरिका के एमोरी यूनीवर्सिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने दिल की बीमारी से पीड़ित मरीजों और अवसाद के लक्षणों के बीच संबंधों पर गहरा अध्ययन किया है।

अध्ययन में कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती दिल के दौरे से पीड़ित लगभग 20 प्रतिशत मरीज अवसाद के लक्षणों से ग्रसित थे।