🌹🌹प्रेरणादायक दंड🌹🌹Great Judgement

💥💥💥💥💥💥💥💥💥 we can also do same type of decisions.

🌹🌹प्रेरणादायक दंड🌹🌹

अमेरिका में एक पंद्रह साल का लड़का था, स्टोर से चोरी करता हुआ पकड़ा गया। पकड़े जाने पर गार्ड की गिरफ्त से भागने की कोशिश में स्टोर का एक शेल्फ भी टूट गया।

जज ने जुर्म सुना और लड़के से पूछा,

“तुमने क्या सचमुच ब्रैड और पनीर का पैकेट” चुराया था ?

लड़के ने नीचे नज़रें कर के जवाब दिया। ;- हाँ’।
जज,:- ‘क्यों ?’
लड़का,:- मुझे ज़रूरत थी।
जज:- ‘खरीद लेते।
लड़का:- ‘पैसे नहीं थे।’
जज:- घर वालों से ले लेते।’
लड़का:- ‘घर में सिर्फ मां है।
बीमार और बेरोज़गार है, ब्रैड और पनीर भी उसी के लिए चुराई थी
जज:- तुम कुछ काम नहीं करते ?
लड़का:- करता था एक कार वाशिंग प्वाइंट में।
मां की देखभाल के लिए एक दिन की छुट्टी की थी, तो मुझे निकाल दिया गया।’
जज:- तुम किसी से मदद मांग लेते?
लड़का:- सुबह से घर से निकला था, तकरीबन पचास लोगों के पास गया, बिल्कुल आख़िर में ये क़दम उठाया।

जिरह ख़त्म हुई, जज ने फैसला सुनाना शुरू किया, चोरी और पनीर ब्रैड की चोरी बहुत शर्मनाक जुर्म है । और इस जुर्म के हम सब ज़िम्मेदार हैं। ‘अदालत में मौजूद हर शख़्स मुझ सहित सब मुजरिम हैं, इसलिए यहाँ मौजूद हर शख़्स पर दस-दस डालर का जुर्माना लगाया जाता है। दस डालर दिए बग़ैर कोई भी यहां से बाहर नहीं निकल सकेगा।’

ये कह कर जज ने दस डालर अपनी जेब से बाहर निकाल कर रख दिए और फिर पेन उठाया लिखना शुरू किया:- इसके अलावा मैं स्टोर पर एक हज़ार डालर का जुर्माना करता हूं कि उसने एक भूखे बच्चे से ग़ैर इंसानी सुलूक करते हुए पुलिस के हवाले किया।
अगर चौबीस घंटे में जुर्माना जमा नहीं किया तो कोर्ट स्टोर सील करने का हुक्म दे देगी।’
जुर्माने की पूर्ण राशि इस लड़के को देकर कोर्ट उस लड़के से माफी तलब करती है।

फैसला सुनने के बाद कोर्ट में मौजूद लोगों के आंखों से आंसू तो बरस ही रहे थे, उस लड़के के भी हिचकियां बंध गईं। वह लड़का बार बार जज को देख रहा था जो अपने आंसू छिपाते हुए बाहर निकल गये।

क्या हमारा समाज, सिस्टम और अदालत इस तरह के निर्णय के लिए तैयार है ?

चाणक्य ने कहा है कि यदि कोई भूखा व्यक्ति रोटी चोरी करता पकड़ा जाए तो उस देश के लोगों को शर्म आनी चाहिए ।

यह रचना दिल को छू गई।
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जय हिन्द 🇮🇳 🙏

MUMBAI: Bollywood star Hrithik Roshan has partnered with a non-profit organisation to facilitate 1.2 lakh meals for senior citizens, daily wage workers and low-income group during the lockdown period.

The country is witnessing a 21-day lockdown period to contain the spread of coronavirus pandemic. This has severely affected the lives of daily wage workers and others.

https://m.economictimes.com/magazines/panache/no-one-should-sleep-hungry-hrithik-ties-up-with-akshaya-patra-to-provide-1-2-lakh-meals-for-daily-wage-workers-senior-citizens/amp_articleshow/75029424.cmshttps://m.economictimes.com/magazines/panache/no-one-should-sleep-hungry-hrithik-ties-up-with-akshaya-patra-to-provide-1-2-lakh-meals-for-daily-wage-workers-senior-citizens/amp_articleshow/75029424.cms

Dr Reddys

No one should sleep hungry when the times are difficult

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Blogger want that there should not be any wastage of the food anywhere hotels,schools,homes so taht it can be distributed to all hungry persons.

While the lockdown in India have been put into place to save lives, it leaves a great number of migrant labourers stranded and puts the poorest at risk to die rather from hunger than from the coronavirus.

https://www.drreddys.com/our-story/our-employees-respond-covid19/articles/no-one-should-sleep-hungry-when-the-times-are-difficult/

Karun Gaur and the society in his residency decided to act, by distributing food. The residency donated the food and 10 volunteers went to the three neighbourhood slums in Hyderabad’s Hitech City to provide rice, pulses and cooking oil to 100 families. The initiative got supported by the police and local administration, which made sure that only people in dire need get their food package.

There was a long queue waiting and many smiles and a sense of relief on the faces of those who got their package and the possibility to feed their family.

“No one should sleep hungry when the times are difficult. There is very little one can do to fight this pandemic, but the least we can do is to support each other.

It was a satisfying experience, as the people we could help are hundreds of miles away from their homes with no food to eat and no conveyance to go back to their hometowns.”

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