किसी भी संगठन से जुड़ने के फायदे। You can get benefits by joining any good organisation

मोटिवेशनल स्पीकर, यूट्यूबर, ब्लॉगर का मानना है कि किसी भी अच्छे संगठन से जोड़कर आप लोगों का फायदा कर सकते हैं और अपना भी

किसी भी संगठन से जुड़ने के फायदे। You can get benefits by joining any good organisation

संगठन

*एक आदमी था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था, उसको सभी जानते थे ,बड़ा मान सम्मान मिलता था; अचानक किसी कारण वश वह निष्क्रीय रहने लगा , मिलना - जुलना बंद कर दिया और संगठन से दूर हो गया।* *कुछ सप्ताह पश्चात् एक बहुत ही ठंडी रात में उस संगठन के मुखिया ने उससे मिलने का फैसला किया । मुखिया उस आदमी के घर गया और पाया कि आदमी घर पर अकेला ही था। एक बोरसी में जलती हुई लकड़ियों की लौ के सामने बैठा आराम से आग ताप रहा था। उस आदमी ने आगंतुक मुखिया का बड़ी खामोशी से स्वागत किया।* *दोनों चुपचाप बैठे रहे। केवल आग की लपटों को ऊपर तक उठते हुए ही देखते रहे। कुछ देर के बाद मुखिया ने बिना कुछ बोले, उन अंगारों में से एक लकड़ी जिसमें लौ उठ रही थी (जल रही थी) उसे उठाकर किनारे पर रख दिया। और फिर से शांत बैठ गया।* *मेजबान हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था। लंबे समय से अकेला होने के कारण मन ही मन आनंदित भी हो रहा था कि वह आज अपने संगठन के मुखिया के साथ है। लेकिन उसने देखा कि अलग की हुई लकड़ी की आग की लौ धीरे धीरे कम हो रही है। कुछ देर में आग बिल्कुल बुझ गई। उसमें कोई ताप नहीं बचा। उस लकड़ी से आग की चमक जल्द ही बाहर निकल गई।* *कुछ समय पूर्व जो उस लकड़ी में उज्ज्वल प्रकाश था और आग की तपन थी वह अब एक काले और मृत टुकड़े से ज्यादा कुछ शेष न था।* *इस बीच.. दोनों मित्रों ने एक दूसरे का बहुत ही संक्षिप्त अभिवादन किया, कम से कम शब्द बोले। जाने से पहले मुखिया ने अलग की हुई बेकार लकड़ी को उठाया और फिर से आग के बीच में रख दिया। वह लकड़ी फिर से सुलग कर लौ बनकर जलने लगी और चारों ओर रोशनी तथा ताप बिखेरने लगी।* *जब आदमी, मुखिया को छोड़ने के लिए दरवाजे तक पहुंचा तो उसने मुखिया से कहा मेरे घर आकर मुलाकात करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।*

संगठन (organisation) वह सामाजिक व्यवस्था या युक्ति है जिसका लक्ष्य एक होता है, जो अपने कार्यों की समीक्षा करते हुए स्वयं का नियन्त्रण करती है, तथा अपने पर्यावरण से जिसकी अलग सीमा होती है। संगठन तरह-तरह के हो सकते हैं – सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, सैनिक, व्यावसायिक, वैज्ञानिक आदि।

आज आपने बिना कुछ बात किए ही एक सुंदर पाठ पढ़ाया है कि अकेले व्यक्ति का कोई अस्तित्व नहीं होता, संगठन का साथ मिलने पर ही वह चमकता है और रोशनी बिखेरता है ; संगठन से अलग होते ही वह लकड़ी की भाँति बुझ जाता है। *मित्रों संगठन से ही हमारी पहचान बनती है, इसलिए संगठन हमारे लिए सर्वोपरि होना चाहिए ।*

संगठन के प्रति हमारी निष्ठा और समर्पण किसी व्यक्ति के लिए नहीं, उससे जुड़े विचार के प्रति होनी चाहिए । *संगठन किसी भी प्रकार का हो सकता है , पारिवारिक , सामाजिक, व्यापारिक (शैक्षणिक संस्थान, औधोगिक संस्थान ) सांस्कृतिक इकाई , सेवा संस्थान आदि।*

*संगठनों के बिना मानव जीवन अधूरा है , अतः हर क्षेत्र में जहाँ भी रहें संगठित रहें ।
इस कहानी को पढने के बाद विचार करें और आपके आस पास जो लोग संघर्ष से थक कर एकांत में चले गये हैं उनको इस कहानी के द्वारा संदेश दें।

संगठनात्मक विकास (OD) किसी संगठन की प्रभावकारिता और व्यावहारिकता को बढ़ाने के लिये एक नियोजित, संगठन-स्तरीय प्रयास होता है। वॉरेन बेनिस (Warren Bennis) ने OD का उल्लेख परिवर्तन के प्रति एक प्रतिक्रिया, एक जटिल शिक्षात्मक रणनीति के रूप में किया है, जिसका उद्देश्य संगठन के विश्वासों, दृष्टिकोणों, मूल्यों और संरचना को बदलना होता है, ताकि उन्हें नई प्रौद्योगिकियों, विपणन और चुनौतियों, तथा स्वतः परिवर्तन की आश्चर्यचकित कर देने वाली दर के साथ बेहतर ढंग से अनुकूलित किया जा सके. OD न तो “किसी संगठन को बेहतर बनाने के लिये की गई कोई गतिविधि है”, न ही यह “संगठन का प्रशिक्षण कार्य है”; यह एक विशिष्ट प्रकार का अंतिम परिणाम प्राप्त करने के लिये एक विशिष्ट प्रकार की परिवर्तन प्रक्रिया है। OD में व्यवहारात्मक विज्ञान की जानकारी का प्रयोग करते हुए संगठन की “प्रक्रियाओं” में हस्तक्षेप करना[1] तथा साथ ही संगठनात्मक प्रतिबिंब, प्रणाली सम्मिलन, नियोजन व स्वतः विश्लेषण शामिल हो सकता है।

मुख्यतः कर्ट लेविन (Kurt Lewin) (1898-1947) को OD का संस्थापक जनक माना जाता है, हालांकि 1950 के दशक के मध्य में इस अवधारणा के प्रचलित होने से पूर्व ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी। लेविन से समूह-गतिविज्ञान और कार्यवाही-अनुसंधान के विचार प्राप्त हुए जो बुनियादी OD प्रक्रिया को मज़बूती देते हैं और साथ ही इसके लिये सहयोगपूर्ण परामर्श/उपभोक्ता लोकाचार भी प्रदान करते हैं। संस्थागत रूप से, लेविन ने MIT में “रिसर्च सेंटर फॉर ग्रुप डाइनामिक्स (Research Center for Group Dynamics)” की स्थापना की, जो उनकी मृत्यु के बाद मिशिगन स्थानांतरित कर दिया गया। RCGD सहकर्मी उन लोगों में से थे, जिन्होंने नैशनल ट्रेनिंग लैबोरेटरीज़ (National Training Laboratories)(NTL) की स्थापना की, जिससे T-समूह और समूह-आधारित OD का जन्म हुआ। UK में, टैवीस्टॉक इन्स्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन रिलेशन्स (Tavistock Institute of Human Relations) प्रणाली सिद्धांतों को विकसित करने में महत्वपूर्ण था। संयुक्त TIHR पत्रिका ह्यूमन रिलेशन्स (Human Relations) इस क्षेत्र में एक प्रारंभिक पत्रिका थी। अब द जर्नल ऑफ अप्लाइड बिहेवियरल साइंसेज़ (The Journal of Applied Behavioral Sciences) इस क्षेत्र की शीर्ष पत्रिका है।

“संगठन विकास” शब्दावली का प्रयोग अक्सर संगठनात्मक प्रभावकारिता के साथ विनिमेयता के अनुसार किया जाता है, विशेषतः जब इसका प्रयोग एक संगठन के भीतर किसी एक विभाग के नाम के रूप में किया जा रहा हो. संगठन विकास एक प्रगितीशील क्षेत्र है, जो सकारात्मक वयस्क विकास (Positive Adult Development) सहित अनेक नई विचारधाराओं के प्रति प्रतिक्रियाशील है।

https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%95_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8

https://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-MAT-latest-damoh-news-031513-2524875-NOR.html

https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%A8

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