व्यवहार कुशलता व्यक्तित्व पहचान।

 

We need to understand well व्यवहार कुशलता आपकी व्यक्तित्व की निशानी है। 

 

!! नेत्रहीन संत !!

एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा।

नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहले आपके सिपाही गये हैं, बाद में आपके मंत्री गये, अब आप स्वयं पधारे हैं। इसी रास्ते से आप आगे जायें तो मुलाकात हो जायगी। संत के बताये हुये रास्ते में राजा ने घोड़ा दौड़ाया और जल्दी ही अपने सहयोगियों से जा मिला और नेत्रहीन संत के कथनानुसार ही एक दूसरे से आगे पीछे पहुंचे थे।

यह बात राजा के दिमाग में घर कर गयी कि नेत्रहीन संत को कैसे पता चला कि कौन किस ओहदे वाला जा रहा है। लौटते समय राजा अपने अनुचरों को साथ लेकर संत की कुटिया में पहुंच कर संत से प्रश्न किया कि आप नेत्रविहीन होते हुये कैसे जान गये कि कौन जा रहा है, कौन आ रहा है ?

राजा की बात सुन कर नेत्रहीन संत ने कहा महाराज आदमी की हैसियत का ज्ञान नेत्रों से नहीं उसकी बातचीत से होती है। सबसे पहले जब आपके सिपाही मेरे पास से गुजरे तब उन्होंने मुझसे पूछा कि ऐ अंधे इधर से किसी के जाते हुये की आहट सुनाई दी क्या ? तो मैं समझ गया कि यह संस्कार विहीन व्यक्ति छोटी पदवी वाले सिपाही ही होंगे।

जब आपके मंत्री जी आये तब उन्होंने पूछा बाबा जी इधर से किसी को जाते हुये….. तो मैं समझ गया कि यह किसी उच्च ओहदे वाला है, क्योंकि बिना संस्कारित व्यक्ति किसी बड़े पद पर आसीन नहीं होता। इसलिये मैंने आपसे कहा कि सिपाहियों के पीछे मंत्री जी गये हैं।

जब आप स्वयं आये तो आपने कहा सूरदास जी महाराज आपको इधर से निकल कर जाने वालों की आहट तो नहीं मिली तो मैं समझ गया कि आप राजा ही हो सकते हैं। क्योंकि आपकी वाणी में आदर सूचक शब्दों का समावेश था और दूसरे का आदर वही कर सकता है जिसे दूसरों से आदर प्राप्त होता है। क्योंकि जिसे कभी कोई चीज नहीं मिलती तो वह उस वस्तु के गुणों को कैसे जान सकता है!

दूसरी बात यह संसार एक वृक्ष स्वरूप है- जैसे वृक्ष में डालियाँ तो बहुत होती हैं पर जिस डाली में ज्यादा फल लगते हैं वही झुकती है। इसी अनुभव के आधार में मैं नेत्रहीन होते हुये भी सिपाहियों, मंत्री और आपके पद का पता बताया अगर गलती हुई हो महाराज तो क्षमा करें।

राजा संत के अनुभव से प्रसन्न हो कर संत की जीवन वृत्ति का प्रबंन्ध राजकोष से करने का मंत्री जी को आदेशित कर वापस राजमहल आया।

शिक्षा:-
आजकल हमारा मध्यमवर्ग परिवार संस्कार विहीन होता जा रहा है। थोड़ा सा पद, पैसा व प्रतिष्ठा पाते ही दूसरे की उपेक्षा करते हैं, जो उचित नहीं है। मधुर भाषा बोलने में किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं होता है। अतः मीठा बोलने में कंजूसी नहीं करनी चाहिये।

व्यवहार कुशलता के लक्षण

व्यवहार कुशलता के क्या लक्षण है

व्यवहार कुशलता का एक उदाहरण बताइए

व्यवहार कुशलता का अर्थ

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व्यवहार परिभाषा

व्यवहार कुशलता का एक उदाहरण दीजिए

व्यवहार पर सुविचार

व्यवहार का अर्थ क्या हैव्यवहार

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सामाजिक जीवन में लोकप्रियता के दरवाजे खोलने की कुंजी है

व्यवहार का अर्थ in English

व्यवहार ज्ञान मराठी

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जो व्यक्ति व्यवहार कुशल होता है वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। उसके जीवन में पग-पग पर सफलता मिलती रहती है। वह अपने व्यवहार से दूसरों को प्रभावित कर लेता है । अगर किसी को सफल व्यक्ति मानते हो तो भी मान लेना चाहिए कि वह दूसरों से अधिक व्यवहार कुशल है।

जीवन में सफलता एवं लोकप्रियता अर्जित करने हेतु व्यवहार कुशलता का होना बहुत जरूरी होता है। किसी भी व्यक्ति को, जो अपने क्षेत्र में बुलंदियों को छूने की चाहत रखता है, अपने व्यक्तित्व का कुशलतापूर्वक निर्माण और विकास करना चाहिए। आपके पास ज्ञान का अकूत भंडार हो सकता है, आप में आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा है, आप आत्मबल एवं संकल्प शक्ति से सराबोर हैं, लेकिन यदि आप में व्यवहार कुशलता नहीं है, तो आपकी राह में अड़चनों का अंबार लग जाएगा। ऐसे में आपकी अधिकांश ऊर्जा उन अड़चनों को दूर करने में ही व्यर्थ हो जाएगी।

व्यवहार कुशलता द्वारा ही हम अपने साथ रहने वाले संगी-साथियों को अपने साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। कहा भी गया है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। आपको जीवन में सफल होने के लिए अपने संगी-साथियों, भाई-बंधु, शुभचिंतकों, गुरुजनों आदि की कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में थोडी बहुत जरूरत पड़ती ही है।  व्यवहार कुशलता से आप अनजान व्यक्तियों को भी आत्मीय बनाकर अपने साथ चलने के लिए तैयार कर सकते हैं। इसके माध्यम से आप न केवल अकेली शक्ति को सामूहिक शक्ति में बदल सकते हैं, बल्कि अपनी सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हुए ऐसी बुलंदियों को भी फतह कर सकते हैं, जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। नकारात्मक दृष्टिकोण से किए गए कार्य जहां हमारे लिए पतन का द्वार बनते हैं, वहीं व्यवहार कुशलता एवं सकारात्मक दृष्टिकोण हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं होते।

https://m-hindi.webdunia.com/my-blog/human-behavior-117011400089_1.html?amp=1

कुशल  व्यवहार  आपके जीवन का आईना है..यइसका    आप    जितना अधिक इस्तेमाल करेंगे आपकी चमक उतनी ही बढ़ जाएगी…! व्यवहार में कुशल होने का मतलब है: “हालात की नज़ाकत को समझने की काबिलीयत रखना और उसके मुताबिक ऐसी बात कहना या काम करना जो सबसे उचित हो।” जिस तरह हमारी उँगलियाँ चिपचिपी, कोमल, नरम, गरम या फिर रोएँदार चीज़ को महसूस कर लेती हैं, ठीक उसी तरह व्यवहार कुशल व्यक्‍ति दूसरों की भावनाओं को महसूस कर सकता है।

वह अच्छी तरह समझ लेता है कि उसकी कही बात या उसके किए काम का दूसरों पर कैसा असर हो रहा है। लेकिन व्यवहार में कुशल होना सिर्फ एक हुनर ही नहीं है बल्कि इसके लिए एक व्यक्‍ति में दूसरों को ठेस न पहुँचाने की दिली तमन्‍ना भी होनी चाहिए

।माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को दूसरों की परवाह करना सिखाएँ क्योंकि यही गुण उन्हें कुशलता से व्यवहार करने के लिए उकसाएगा । जब आपको किसी से कोई शिकायत होती है, खासकर तब उसके साथ अपनी बातचीत में व्यवहार कुशलता दिखाना बहुत ज़रूरी होता है, वरना आप बड़ी आसानी से उसके सम्मान को ठेस पहुँचा सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि सबसे पहले आप उसकी कुछ अच्छाइयों का ज़िक्र करें।

उसकी नुक्‍ताचीनी करने के बजाय समस्या को सुलझाने पर ध्यान दें। समझाएँ कि उसके तौर-तरीकों की वजह से आप कैसा महसूस करते हैं और उसकी कौन-सी बात है, जो आप चाहते हैं कि वह बदले। फिर उसकी भी सुनने के लिए तैयार रहें। हो सकता है कि आपने ही उसे गलत समझा हो। लोगों की यह ख्वाहिश होती है कि आप उनके विचारों को समझें, फिर चाहे आप उनसे सहमत न भी हों।

अगर आप सोच-समझकर बात करने की कला सीखते हैं तो यह कला आपको दूसरों के साथ एक अच्छा रिश्‍ता बनाने में मदद देगी, तब भी जब दूसरे आपके इरादे को गलत समझ लेते हैं और आपसे नाखुश और नाराज़ होते हैं। हमेशा यह समझने की कोशिश कीजिए कि आपके शब्दों का दूसरों पर कैसा असर हो सकता है। जब आप व्यवहार में कुशल होने की कोशिश करेंगे तो आप खुशी का अनुभव करेंगे

किसी भी व्यक्ति का कुशल एवं बैलैंस्ड व्यवहार-उसके सुन्दर एवं संतुलित जीवन का दर्पण होता है। ऐसा व्यक्ति अपने इष्ट मित्रों, बन्धु-बांधवों में, श्रेष्ठ एवं प्रतिष्ठित माना जाता है। कहा भी गया है कि हमें दूसरों से वैसा व्यवहार कदापि नहीं करना चाहिए जैसा हम स्वयं के साथ-पसन्द नहीं करते। अच्छी व्यवहार कुशलता प्रभु का एक दिव्य वरदान होता है।

यदि आप दूसरों का ध्यान रखें तो वे स्वत: ही आप का स्वागत एवं अभिनन्दन करेंगें। कई बार हमारी कुण्ठा के कारण हमारा व्यवहार चिड़चिड़ा, खिजाऊ, शक्की एवं कुण्ठित हो जाता है। यदि हम चिड़चिड़ेपन का पल्लू पकड़ लेंगे तो जल्दी ही हम अपनों में बेगाने हो जाएंगे। स्त्रियां ही नहीं, पुरुष भी चिड़चिड़े स्वभाव के पाए गए हैं।

स्त्रियां प्राय: घरेलू कामकाज के बोझ तले इतनी दब जाती हैं कि वे जल्दी ही छोटी छोटी बातों से खीज जाती हैं। खीजना या चिड़चिड़ापन विकसित कर लेना रूग्ण मानसिकता का परिचायक है। वह प्राय: अपनी कुण्ठा को दूसरों को अपमानित करके शांत कर लेती हैं।

ऐसी तुनक मिजाजी स्त्रियां परिवार के लिए समस्या का कारण बन जाती हैं। अपने बच्चों पर बात बात पर अकारण बरस पडऩा उनका प्रतिदिन का काम हो जाता है जिसके कारण परिवार के सभी सदस्यों की जान आफत में फंसी होती है। यह हड्डी न निगली जाती है, न हीं छोड़ी जाती है।

हम प्राय: अपने अपने दु:खों से उतना दु:खी नहीं होते जितना दूसरों के सुखों से ईष्र्या करते हैं। दूसरे के वैभव एवं लग्जऱी को देख कर कुठित हो उठते हैं। यह प्रवृत्ति बहुत से नर-नारियों में होती है। बहुत कम लोग इस दुर्गुण से दूर रहते हैं। ऐसे लोग सब जगह इज्जत पाते हैं और सुख भोगते हैं। हंसमुख एवं व्यवहार कुशल लोगों को सब पसंद करते हैं।

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