द्वेष भावना क्यों रखें?

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P149H: दोस्तों किसी से भी द्वेष भावना क्यों रखें? दोस्तों मैं आपको बता दूं कि यह सभी विचार मेरे हैं। और मैं चाहता हूं कि मेरे श्रोता का ज्यादा से ज्यादा मेरे एपिसोड से फायदा उठा पाए। अगर आपको कोई स्पेशल टॉपिक पर कोई एपिसोड बनवाना है तो वह कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं ।और अगर आपको अच्छा लगता है तो वॉइस मैसेज से या कमेंट बॉक्स में अपना कमेंट देने से ना चुके हैं ।इससे मुझे भी अच्छा लगेगा अगर मैं अच्छा चाह रहा हूं ।तो आपका प्यार तो मुझे मिलना मानता ही है। दोस्तों मैं यूट्यूब पर भी हूं पॉडकास्टर भी हूं लाइफ कोच भी हूं self-improvement के ऊपर मैंने बुक भी लिखी है कि अपनी जिंदगी से प्यार करें ।Love your life किंडल पर 12 देशों में जा रही है। टेक्सटाइल का मेरा करीब 40 साल का अनुभव है ।आपके प्यार में कोशिश करते हैं, कि हम क्या कुछ आप से सीख पाए और आपको सिखा पाए। इच्छा आपकी है कितना सीखना चाहते हैं। थैंक यू वेरी मच और ब्लॉगिंग जो वेबसाइट है ।वह मैं दे रहा हूं उसे मेरे ब्लॉक भी देखिए शेर भी करिए और अपने आइडियाज भी दीजिए। ऑल द बेस्ट।

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ऐसे लोग शायद ही मिलें जिनकी पार्टनर से कभी नोकझोंक या अनबन नहीं हुई हो। रिलेशनशिप के बीच यह एक आम बात है। लेकिन अगर यह एक सीमा से बढ़ने लगे तो संबंध टूटने का खतरा भी पैदा हो सकता है। फिलहाल, कोरोना वायरस महामारी के चलते लगे लॉकडाउन की वजह से भी ज्यादातर लोग मानसिक रूप से परेशान हैं। ऐसे में, खास तौर पर सावधान रहने की जरूरत है। यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए कि संबंध बनाने में तो बरसों लग जाते हैं, पर ये एक झटके में टूट सकते हैं। संबंध अनमोल होते हैं। ये हमारी भावनाओं से जुड़े होते हैं, इसलिए अगर नोकझोंक व मनमुटाव हो तो सब्र से काम लें। संबंधों को ठीक रखने के जानें कुछ टिप्स।  

1. अहंकार मत रखें
पार्टनर्स के बीच मतभेद पैदा होना एक स्वाभाविक बात है। कई मुद्दों पर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है। इससे संबंधों में कोई दुराव नहीं आता, लेकिन अगर कोई पार्टनर अहंकार की भावना से ग्रस्त हो तो वह दूसरे को ज्यादा महत्व नहीं देता। ऐसे में, संबंध लंबे समय तक नहीं चल सकते। इसलिए अगर पार्टनर से बेहतर संबंध बनाए रखना हो तो अहंकार से बचना होगा।

2. जिद से भी बिगड़ते हैं रिश्ते
कुछ लोग बेहद जिद्दी स्वभाव के होते हैं। वे चाहते हैं कि उन्होंने जो बात कही है, वह हर हाल में मानी जाए। अपनी जिद के आगे वे किसी तरह के लॉजिक को मानने के लिए तैयार नहीं होते। शुरुआती दौर में कोई भी एक हद तक जिद को झेलता है, लेकिन जब जिद लिमिट को क्रॉस करने लगती है तो लड़ाई-झगड़े शुरू हो जाते हैं। कई बार पार्टनर लड़-झगड़ कर शांत हो जाते हैं, तो कई बार इस वजह से उनके रिश्ते में दरार भी पड़ जाती है।  

3. मारपीट की नौबत
ऐसा भी देखने में आता है कि पार्टनर्स के बीच शुरू हुई बहस लड़ाई का रूप ले लेती है और एक ऐसी स्थिति आती है, जब नोकझोंक और वाद-विवाद के साथ मारपीट भी शुरू हो जाती है। इसकी शुरुआत चाहे जो करे, यह बहुत ही बुरी स्थिति होती है। शारीरिक हिंसा सबसे गलत है। अगर पुरुष महिला पर हाथ उठाता है तो वह तत्काल कानूनी सहायता लेकर पुरुष साथी को जेल की हवा खिलवा सकती है, वहीं इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि कुछ महिलाएं भी अपने पुरुष साथियों पर हाथ उठी देती हैं। ऐसी हालत में पुरुष कहीं से किसी तरह की कोई सहायता हासिल नहीं कर सकता।

4. गैरजरूरी बहस से बचें
अगर पार्टनर्स के बीच किसी भी मुद्दे को लेकर मतभेद हों तो बहस करना गलत नहीं है, लेकिन उसकी एक सीमा होनी चाहिए। गैरजरूरी बहस से हमेशा बचने की कोशिश करनी चाहिए। बहस कर रहे हों तो उसके कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। बहस किसी मुद्दे पर करें, उसे लेकर इस हद तक उत्तेजित न हों कि लड़ाई-झगड़े और मारपीट की नौबत आ जाए।

5. व्यक्तिगत लांछन नहीं लगाएं
हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि दूसरों के साथ वैसा ही बर्ताव करना जरूरी है, जैसा आप अपने साथ पसंद करते हैं। अगर आप और आपके साथी में एक ही बात को लेकर बार-बार बहस या लड़ाई हो रही है, तो इसका निबटारा करने के लिए समस्या की जड़ तक पहुंचें। कौन-सी ऐसी बातें हैं जिन पर आम राय बनाना संभव है, और कौन-सी नहीं, इस पर विचार करें। अगर आपको लगे कि किसी मित्र या फैमिली मेंबर की सलाह से इन मुद्दों का समाधान बेहतर तरीके से हो

प्रोफेशनल हो या पर्सनल, हर र‍िश्‍ते में ऐसे रखें ट्रांसपैरेंसी

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प्रोफेशनल हो या पर्सनल, हर र‍िश्‍ते में ऐसे रखें ट्रांसपैरेंसी

अपने रिश्तों को संभालना और संवारना भी एक कला है। यह बात बिलकुल सही है कि हमारे संबंधों में पूरी सच्चाई होनी चाहिए लेकिन पारदर्शिता के मामले में सजगता क्यों ज़रूरी है…

संबंधों की पारदर्शिता
अपने रिश्तों को संभालना और संवारना भी एक कला है। यह बात बिलकुल सही है कि हमारे संबंधों में पूरी सच्चाई होनी चाहिए लेकिन पारदर्शिता के मामले में सजगता क्यों ज़रूरी है, जानने के लिए ज़रूर पढ़ें यह लेख। पता नहीं वो लोग मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे, मुझे उनसे यह सब नहीं कहना चाहिए था, दीदी को मैंने आकाश की नाराज़गी के बारे में बेकार ही बता दिया, अब तो यह बात सारे रिश्तेदारों को मालूम हो जाएगी…।

कई बार जीवन में ऐसी स्थितियां आती हैं, जब हमारे मन में यह सवाल उठता है कि अपने संबंधों के मामले में हमें कितनी पारदर्शिता बरतनी चाहिए? यहां मनोवैज्ञानिक सलाहकार सुनीता पाण्डेय बता रही हैं कि अपने रिश्तों को निभाते समय हमें किस तरह और कितनी पारदर्शिता बरतनी चाहिए…      

दांपत्य की दहलीज़

पति-पत्नी का रिश्ता बेहद नाज़ुक होता है। इसलिए दांपत्य जीवन की दहलीज़ पर कदम रखते ही आपको अपने रिश्ते के प्रति संजीदा हो जाना चाहिए। शादी के बाद पति-पत्नी एक नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं। इसलिए उनके रिश्ते में सहजता और खुलापन होना बहुत ज़रूरी है।

लाइफ पार्टनर के साथ अपने मन से जुड़ी हर बात खुलकर शेयर करें।  दुराव-छिपाव के लिए इस रिश्ते में कोई जगह नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे पति-पत्नी के बीच शक की दीवार खड़ी हो जाती है।

हां, यहां इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि लाइफ पार्टनर शादी के बाद आपकी जिंदगी में शामिल होता है। इसलिए अपने अतीत पर पति-पत्नी दोनों का निजी अधिकार होता है।

आपको लाइफ पार्टनर के साथ ऐसी बातें शेयर नहीं करनी चाहिए, जिनकी वजह से रिश्ते में कड़वाहट पैदा हो। अपने साथी को थोड़ा पर्सनल स्पेस भी दें। छोटी-छोटी बातों को लेकर पति या पत्नी से बहुत ज्य़ादा पूछताछ न करें।  

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