दहेज कितना बड़ा अन्याय नारी जाति के साथ? Why dowry is not considered as a worst thing on the earth?

प्यारे साथियों, आपका दोस्त ब्लॉगर, पॉडकास्टर, यूट्यूबर ,लेखक एवं कपड़ा उद्योग का विशेषज्ञ आप सभी को हमारे हिंदू समाज की दहेज की प्रथा पर कुछ जरूरी बातें जा रहा हूं

दहेज कितना बड़ा अन्याय नारी जाति के साथ? Why dowry is not considered as a worst thing on the earth?

दोस्तों पहले के मुकाबले में अभी काफी सुधार हुआ है नहीं तो मैंने देखा था जब हम छोटे थे किस तरह से ससुराल पक्ष जबरदस्त दहेज की मांग करता था l

कुछ सरकार ने कानून बनाएं सजा का प्रावधान किया उससे कमी तो आई लेकिन अंदरूनी खुशी बेटी बेटे के विवाह की खत्म हो गई क्योंकि इन लोगों ने एग्जाम के ऊपर इल्जाम लगाने शुरू कर दिए ।समाज में एक जबरदस्त बुराई का आना हुआ।

ना जाने कितने घरों की बेटियों की खुशियां उजाड़ी गई, मां बाप ने अपनी खुशियों की आहुति दी, फिर भी वो अपने बच्चों की वैवाहिक जीवन को पटरी पर ना ला सके।

10 लाख का दहेज़
5 लाख का खाना
घड़ी पहनायी
अंगूठी पहनाई
मंडे का खाना
फिर सब सुसरालियो को कपड़े देना ।
बारात को खिलाना फिर बारात को जाते हुए भी साथ में खाना भेजना
बेटी हो गई कोई सज़ा हो गई।
और यह सब जब से शुरू होता है जबसे बातचीत यानी रिश्ता लगता है
फिर कभी नन्द आ रही है, जेठानी आ रही है
कभी चाची सास आ रही है मुमानी सास आ रही है टोलीया बना
बना के आते हैं और बेटी की मां चेहरे पे हलकी सी मुस्कराहट लिए सब
को आला से आला खाना पेश करती है सबका अच्छी तरह से वेलकम
करती है फिर जाते टाइम सब लोगो को 500-500 रूपे भी दिए जाते
है फिर मंगनी हो रही है बियाह ठहर रहा है फिर बारात के आदमी तय
हो रहे है 500 लाए या 800
बाप का एक एक बाल कर्ज में डूब जाता है और बाप जब घर आता है
शाम को तो बेटी सर दबाने बैठ जाती है कि मेरे बाप का बाल बाल मेरी
वजह से कर्ज में डूबा है
भगवान के वास्ते इन गंदे रस्म रिवाजों को खत्म कर दो ताकि हर बाप
अपनी बेटी को इज़्ज़त से विदा कर सके।
🚩🚩जय जय सिया राम 🚩🚩

बहुत ही जबरदस्त बुराई है दहेज, इसको किसी भी तरह से समाज में न पनपने दें। इसी बात में सबकी भलाई है।

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