क्यों जरूरी है सत्संग?

🌷 सत्संग और संस्कार की आवश्यकता 🌷

🌅 एक पिता-पुत्र व्यापार धंधा करते थे। पुत्र को पिता के साथ कार्य करते हुए वर्षों बीत गये, उसकी उम्र भी चालीस को छूने लगी। फिर भी पुत्र को पिता न तो व्यापार की स्वतन्त्रता देते थे और न ही तिजोरी की चाबी। पुत्र के मन में सदैव यह बात खटकती। वह सोचता, “यदि पिता जी का यही व्यवहार रहा तो मुझे व्यापार में कुछ नया करने का कोई अवसर नहीं मिलेगा

पुत्र के मन में छुपा क्षोभ एक दिन फूट पड़ा। दोनों के बीच झगड़ा हुआ और सम्पदा का बँटवारा हो गया। पिता पुत्र दोनों अलग हो गये। पुत्र अपनी पत्नी, बच्चों के साथ रहने लगा। पिता अकेले थे, उनकी पत्नी का देहांत हो चुका था। उन्होंने किसी दूसरे को सेवा के लिए भी नहीं रखा क्योंकि उन्हें किसी पर विश्वास नहीं था। वे स्वयं ही रूखा-सूखा भोजन बनाकर खा लेते या कभी चने आदि खाकर ही रह जाते तो कभी भूखे ही सो जाते थे

उनकी पुत्रवधु बचपन से ही सत्संगी थी। जब उसे अपने ससुर की ऐसी हालत का पता चला तो उसे बड़ा दुःख हुआ, आत्मग्लानि भी हुई। उसमें बाल्यकाल से ही धार्मिक संस्कार थे, बड़ों के प्रति आदर व सेवा का भाव था। उसने अपने पति को मनाने का बहुत प्रयास किया परंतु वे ना माने। पिता के प्रति पुत्र के मन में सदभाव नहीं था। अब पुत्रवधु ने एक विचार अपने मन में दृढ़ कर उसे कार्यान्वित किया। वह पहले पति व पुत्र को भोजन कराकर क्रमशः दुकान और विद्यालय भेज देती, बाद में स्वयं ससुर के घर जाती।

भोजन बनाकर उन्हें खिलाती और रात्रि के लिए भी भोजन बनाकर रख देती। कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। जब उसके पति को पता चला तो उसने पत्नी को ऐसा करने से रोकते हुए कहाः “ऐसा क्यों करती हो ? बीमार पड़ जाओगी। तुम्हारा शरीर इतना परिश्रम नहीं सह पायेगा।” पत्नी बोली “मेरे आदरणीय ससुरजी भूखे रहें। तकलीफ पायें और हम लोग आराम से खायें-पियें, यह मैं नहीं देख सकती

मेरा धर्म है बड़ों की सेवा करना, इसके बिना मुझे संतोष नहीं होता। उनमें भी तो मेरे भगवान का वास है। मैं उन्हें खिलाये बिना नहीं खा सकती। भोजन के समय उनकी याद आने पर मेरी आँखों में आँसू आ जाते हैं। उन्होंने ही तो आपको पाल-पोसकर बड़ा किया और काबिल बनाया है, तभी आप मुझे पति के रूप में मिले हैं। आपके मन में कृतज्ञता का भाव नहीं है तो क्या हुआ, मैं उनके प्रति कैसे कृतघ्न हो सकती हूँ

पत्नी के सुंदर संस्कारों ने, सदभाव ने पति की बुद्धि पलट दी। उन्होंने जाकर अपने पिता के चरण छुए, क्षमा माँगी और उन्हें अपने घर ले आये। पति पत्नी दोनों मिलकर पिता की सेवा करने लगे। पिता ने व्यापार का सारा भार पुत्र पर छोड़ दिया।

परिवार के किसी भी व्यक्ति में सच्चा सदभाव है, मानवीय संवेदनाएँ हैं, सुसंस्कार हैं तो वह सबके मन को जोड़ सकता है, घर-परिवार में सुख शांति बनी रह सकती है और यह तभी सम्भव है जब जीवन में सत्संग हो, भारतीय संस्कृति के उच्च संस्कार हों, धर्म का सेवन हो

जीवन का ऐसा कौन-सा क्षेत्र है जहाँ सत्संग की आवश्कता नहीं है ! सत्संग जीवन की अत्यावश्यक माँग है क्योंकि सच्चा सुख जीवन की माँग है और वह सत्संग से ही मिल सकता है|

आपकी आदतें आपके जीवन की नींव होती हैं, फिर चाहे आदतें अच्छी हो या बुरी। जैसे किसी भी मकान की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है वैसे ही आपकी व्यक्तित्व की मजबूती आपकी आदतों पर निर्भर करती हैं। बुरी आदतें आपके जीवन की नींव को कमजोर बना देती हैं तो कोशिश करें अच्छी आदतें अपनाने की।

1.नाखून काटते रहें जो लोग रोज अपने नाखून काटते हैं और उन्हें साफ भी रखते हैं, शनि ऐसा करने वालों का हमेशा खयाल रखते हैं। इसलिए अचानक अगर आप अपने नाखून काटने में आलस करने लगें या आपके नाखून गंदे रहने लगे तो समझें कि आपको शनि दशा सुधारने के लिए उपाय करने चाहिए। नाखून काटने की आदत को कभी ना बदलें। 

2.दान करते रहें अगर आपका दिल गरीबों, जरूरतमंदों को देखकर पसीज जाता है और हर तीज-त्योहार पर गरीब जरूरतमंद की आप मदद करते हैं तो समझें शनिदेव की आप पर विशेष कृपा है। अगर आप गरीबों को काले चने, काले तिल, उड़द दाल और कपड़े सच्चे मन से दान करते हैं, तो आश्वस्त रहिए कि शनिदेव आपका हमेशा कल्याण ही करेंगे।3.छाते की भेंट देगी शनिदेव की छत्र-छायाधूप व बारिश से बचने के लिए छाते दान करने वालों पर शनिदेव की छत्र-छाया हमेशा बनी रहती है। अगर अब तक यह आदत नहीं थी तो इसे तुरंत अपनी अच्छी आदतों में शामिल कर लीजिए। आखिर शनिदेव की छत्र-छाया किसे नहीं चाहिए?  

नेत्रहीन को राह दिखाएंकिसी भी नेत्रहीन व्यक्ति को राह दिखाना, उनकी मदद करना शनि को खुश करने में सहायक सिद्ध होता है। जो लोग भी नेत्रहीन लोगों की अनदेखी नहीं करते, उनकी नि:स्वार्थ मदद करते हैं, शनिदेव उनसे हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उनकी सफलता-उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

 6.शनिवार का उपवासशनिवार का उपवास रखकर अपने हिस्से का भोजन गरीबों को देने की आदत है तो समझें शनि की कृपा से अन्न के भंडार आपके लिए हमेशा खुले रहेंगे। ऐसे व्यक्ति अगर जीवन भर इस नियम का पालन करते हैं तो उन्हें कभी धन-संपदा की कमी नहीं होती। 

7.मछलियों को आहारजो मछली खाते नहीं है बल्कि मछलियों को खाना खिलाते हैं उनसे शनि हमेशा प्रसन्न रहते हैं। इसलिए अगर आपको भी मछलियों को दाना खिलाने की आदत है तो खुशकिस्मत हैं आप, अपनी इस आदत को छूटने ना दें।null 

8.हर दिन स्नान, साफ स्वच्छ रहने की आदत प्रतिदिन स्नान कर खुद को साफ रखने वालों पर शनि की कृपा होती है। पवित्र रहने वालों की शनि हमेशा मदद करते हैं। 

9.सफाई-कर्मियों की मददजो सफाई-कर्मियों का सम्मान करते हैं और उनकी आर्थिक मदद भी करते हैं, शनिदेव उनका साथ कभी नहीं छोड़ते। यह आदत कभी न बदलें, भाग्यशाली बनने की राह यही आदत खोलेगी। शनिदेव इस आदत से अत्यंत प्रसन्न रहते हैं।  10.साथी हाथ बढ़ाना जो लोग जरूरतमंद, परेशान और मेहनतकश लोगों की यथासंभव मदद करते हैं, वे शनिदेव को बेहद पसंद होते हैं। शविदेव उनके सारे कष्ट हर लेते हैं। इसलिए मदद करने की अपनी आदत को सदा बने रहने दें। 

10 अच्छी आदतें in Hindiअच्छी आदतें हिंदी मेंविद्यार्थियों के लिए अच्छी आदतेंपाँच अच्छी आदतें

दोस्तों !  हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में हमारी आदते महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसलिए अच्छी आदतों का होना हर दृष्टिकोण से फायदेमंद है. अगर अच्छी आदते हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा न रहे, तो हमें प्रत्येक काम करने से पहले सोच-विचार करना होगा और इस तरह हम कोई भी काम ठीक ढंग से नहीं कर सकते. अच्छी आदते स्वाभाविक रूप से अच्छा काम करा देती है.

संगति का असर

1-दस मिनट पत्नी के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि जिंदगी बहुत मुश्किल है।

2-दस मिनट पियक्कड़ के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि जिंदगी बहुत आसान है।

3-दस मिनट साधु संतों के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि सब कुछ दान कर दें और संन्यास ले लें

4-दस मिनट राजनेता के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि आपकी सारी पढ़ाई लिखाई बेकार है।

5-दस मिनट जीवन बीमा एजेंट के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि जीने से अच्छा तो मर जाना है।

6-दस मिनट किसी व्यापारी के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि आपकी कमाई कुछ भी नहीं है

7-दस मिनट वैज्ञानिक के पास बैठिए..
आप महसूस करेंगे कि आपमें दुष्टता आपके अज्ञानता के कारण है

8-दस मिनट किसी अच्छे अध्यापक के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि वापिस विद्यार्थी बन जाना चाहिए।

9-दस मिनट किसी किसान या मजदूर के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि आप कठिन परिश्रम नहीं करते हैं।

10-दस मिनट किसी फौजी के पास बैठिए
आप महसूस करेंगे कि आपकी नौकरी और त्याग बहुत तुच्छ है

11- दस मिनट शमशान घाट अर्थी के साथ जाइए आप महसूस करेंगे कि जिंदगी में सब माया मोह है त्याग दें।

12-दस मिनट किसी अच्छे मित्र के पास बैठिए आप महसूस करेंगे कि आपकी जिंदगी स्वर्ग से भी सुंदर है।

 good habit good habit

          Good Habit

अनुशासन के बल पर हम अपनी आदतों को नियंत्रित रख सकते है. हमें बचपन से ही अच्छी आदते विकसित करनी चाहिए, ताकि बड़े होने पर उनसे हमारे चरित्र का निर्माण हो सके.

वैसे इसकी शुरुआत करने में कभी देर नहीं होती. नयी आदतों को सीखने में वक्त लगता है, पर अच्छी आदते एक बार सीख ली जाय तो जीवन को नये मायने देती है.https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-4514747025195846&output=html&h=280&adk=1718585254&adf=4117667119&pi=t.aa~a.373207526~i.16~rp.4&w=387&fwrn=7&fwrnh=100&lmt=1621310910&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=8288175299&tp=genesis&psa=0&ad_type=text_image&format=387×280&url=https%3A%2F%2Fwww.nayichetana.com%2F2016%2F05%2Fwhy-important-of-good-habit-in-hindi.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=323&rw=387&rpe=1&resp_fmts=3&sfro=1&wgl=1&fa=27&adsid=ChEI8KiIhQYQ5oWs5-nTk_-hARI9AFFdXzPJD0rqWEgfgB33cGB9RaUiK6v1nQSnqk4EiwwDC0tT8qawRG-HogLk7TiHqiPA6fiLuaLfCyTtAw&uach=WyJBbmRyb2lkIiwiMTAiLCIiLCJBQzIwMDEiLCI5MC4wLjQ0MzAuMjEwIixbXV0.&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjo2fSx7Imlzc3Vlck9yaWdpbiI6Imh0dHBzOi8vYXR0ZXN0YXRpb24uYW5kcm9pZC5jb20iLCJzdGF0ZSI6OX1d&dt=1621310909969&bpp=11&bdt=3677&idt=-M&shv=r20210511&cbv=%2Fr20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3Da27b5c71fba5f6b1-228b99daaac80012%3AT%3D1621310909%3ART%3D1621310909%3AS%3DALNI_MaWSanKI5HwC6MQYUp17qDjAMUW6w&prev_fmts=0x0%2C412x343&nras=2&correlator=515593037655&frm=20&pv=1&ga_vid=856981080.1621310908&ga_sid=1621310909&ga_hid=69379234&ga_fc=0&u_tz=330&u_his=7&u_java=0&u_h=915&u_w=412&u_ah=915&u_aw=412&u_cd=24&u_nplug=0&u_nmime=0&adx=13&ady=2000&biw=412&bih=766&scr_x=0&scr_y=823&eid=21066431%2C31060005%2C21067496&oid=3&pvsid=3216141941132441&pem=230&ref=https%3A%2F%2Fwww.google.com%2F&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C412%2C0%2C412%2C766%2C412%2C766&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=128&bc=31&jar=2021-05-18-04&ifi=4&uci=a!4&btvi=1&fsb=1&xpc=91mYgk4Ve3&p=https%3A//www.nayichetana.com&dtd=96

आप जरा उस विशाल हाथी के बारे में सोचिये, जो एक टन से भी ज्यादा वजन सिर्फ अपनी सूंड से उठा लेता है. आप जरा यह सोचिये की उसी हाथी को एक पतली सी रस्सी और एक खूंटे की मदद से एक ही जगह पर बंधे रहने का आदी आखिर कैसे बना दिया जाता है ?

जबकि वह जब चाहे तो उसे उखाड़ कर कही भी जा सकता है. इसका answer यह है की बचपन से ही हाथी को मजबूत जंजीर और पेड़ के तने से बांधा जाता है. हाथी के बच्चे की तुलना में जंजीर और तना मजबूत चीज है.

इसलिए तमाम प्रयत्न के बाद भी वह उन्हें तोड़ नहीं पाता और आख़िरकार समझ जाता है की इस कोशिश से उसका कोई फायदा नहीं है. धीरे-धीरे यह उसकी Habit बन जाती है. दिमागी रूप से वह इसका आदी हो जाता है और बड़ा होने पर रस्सी से बंधा होने पर भी उसे तोड़ने की कोशिश नहीं करता.

इसी तरह आदते हमारे अवचेतन मन में भी घुस जाती है और हम स्वतः ही उनके अनुसार काम करने लगते है. अगर हम अच्छी आदते सीखेंगे, तो अच्छा काम करेंगे और बुरी आदते सीखेंगे, तो बुरा ही बनेंगे.

Read: कैसे बदले अपना नकारात्मक दृष्टिकोण ?

कंप्यूटर का गीगो सिद्धांत (gigo) कहता है- अगर आप गलत अन्दर डालोगे तो गलत बाहर आएगा।सही चीजे डालोगे तो सही बाहर आएगा, अच्छा अन्दर डालिए तो अच्छा बाहर निकल कर आएगा| इसी तरह अच्छी आदते अगर हम खुद में विकसित करेंगे तो जीवन में हमें अच्छे परिणाम मिलेंगे.

सफल लोग किसी काम को आसानी से इसलिए कर लेते है क्योंकि वे अपने काम की बुनियादी चीजो के माहिर हो चुके होते है। वास्तव में कामयाबी पाने का हक़ उन्ही लोगो का होता है, जो आदतन अच्छा काम करते है।

यदि हम किसी चीज को सही ढंग से करना चाहते है तो उसकी process भी सही होनी चाहिए. ऐसा तभी होगा, जब अच्छा करना हमारी आदत बन जाएगी. किसी चीज की आदत डालना खेती करने के समान है. इसमें समय लगता है इसलिए धैर्य बनाये रखे.https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-4514747025195846&output=html&h=280&adk=1718585254&adf=892627093&pi=t.aa~a.373207526~i.35~rp.4&w=387&fwrn=7&fwrnh=100&lmt=1621310910&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=8288175299&tp=genesis&psa=0&ad_type=text_image&format=387×280&url=https%3A%2F%2Fwww.nayichetana.com%2F2016%2F05%2Fwhy-important-of-good-habit-in-hindi.html&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=323&rw=387&rpe=1&resp_fmts=3&sfro=1&wgl=1&fa=27&adsid=ChEI8KiIhQYQ5oWs5-nTk_-hARI9AFFdXzPJD0rqWEgfgB33cGB9RaUiK6v1nQSnqk4EiwwDC0tT8qawRG-HogLk7TiHqiPA6fiLuaLfCyTtAw&uach=WyJBbmRyb2lkIiwiMTAiLCIiLCJBQzIwMDEiLCI5MC4wLjQ0MzAuMjEwIixbXV0.&tt_state=W3siaXNzdWVyT3JpZ2luIjoiaHR0cHM6Ly9hZHNlcnZpY2UuZ29vZ2xlLmNvbSIsInN0YXRlIjo2fSx7Imlzc3Vlck9yaWdpbiI6Imh0dHBzOi8vYXR0ZXN0YXRpb24uYW5kcm9pZC5jb20iLCJzdGF0ZSI6OX1d&dt=1621310909969&bpp=9&bdt=3677&idt=9&shv=r20210511&cbv=%2Fr20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3Da27b5c71fba5f6b1-228b99daaac80012%3AT%3D1621310909%3ART%3D1621310909%3AS%3DALNI_MaWSanKI5HwC6MQYUp17qDjAMUW6w&prev_fmts=0x0%2C412x343%2C387x280&nras=3&correlator=515593037655&frm=20&pv=1&ga_vid=856981080.1621310908&ga_sid=1621310909&ga_hid=69379234&ga_fc=0&u_tz=330&u_his=7&u_java=0&u_h=915&u_w=412&u_ah=915&u_aw=412&u_cd=24&u_nplug=0&u_nmime=0&adx=13&ady=3582&biw=412&bih=766&scr_x=0&scr_y=823&eid=21066431%2C31060005%2C21067496&oid=3&pvsid=3216141941132441&pem=230&ref=https%3A%2F%2Fwww.google.com%2F&eae=0&fc=1408&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C412%2C0%2C412%2C766%2C412%2C766&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=128&bc=31&jar=2021-05-18-04&ifi=5&uci=a!5&btvi=2&fsb=1&xpc=MlAK2f2iPM&p=https%3A//www.nayichetana.com&dtd=129

दोस्तों ! यह बात आप जरुर ध्यान रखे की आदते ही हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती है. इसलिए सदैव इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे की जीवन में आपके साथ अच्छी आदते ही बनी रहे.

अगर आपने खुद में अच्छी आदतों को विकसित कर लिया तो ज़िन्दगी की गाड़ी खुद- ब- खुद सही दिशा में चल पड़ेगी.

All The Best !

Thanx For Reading This Motivational Article

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Let us remind ourselves how lucky we are to be able to attend satsang. No matter when or where followers of the spiritual path gather for satsang, it is an important opportunity to make the most of a number of benefits. At satsang we can and should leave the world outside the door.

It is a haven for us in which we all face in the same direction – away from the world outside and towards the Masters and their teachings.

It is a refuge, available every week, and we come together to listen, to learn and to help create and then absorb an atmosphere of peace and love which we can then take away with us.

Here are a few pointers to the purpose of satsang:

  • Satsang helps us remember that this is not our true home. Though we recognize that the creation operates within the will of the Creator.
  • This is not now where we wish to stay. It is an alien land for the soul that is starting to reassert itself after many aeons and millions of lives in servitude to the mind.
  • The soul’s longing to leave this spiritually barren place will be establishing itself in the conscious mind of true seekers.
  • It is to remind us that we have a unique opportunity in having a human birth. In this form only can we make direct contact with the Creator.
  • Through a living Master, and journey all the way home.
  • It helps us to examine the various aspects of the path and to increase our understanding of the importance and significance of the spiritual teachings of the Masters. It is an opportunity to satisfy the intellect – which is a prerequisite to travelling the path.
  • Satsang creates and develops love and harmony among the sangat, encouraging us to remember that we are all members of the same flock, with the same Master who loves and cares for each one of us equally – no favourites, no hierarchy.
  • It sends us away with a revitalized desire to travel the path and attend to our meditation with renewed zeal.
  • Satsang puts ‘a fence around the crop’, as Maharaj used to say. Satsang is a form of protection for the efforts we have made. It nurtures the fragile shoots that we have started to grow through our meditation practice.

It is only through the understanding encouraged by satsang and our continual efforts to comply with the teachings, that our spiritual foundation will be made strong.

The Masters teach that the time spent satisfying our intellect and investigating the path is not time wasted.

Baba Ji has made it clear that he is not here just to answer all our questions but to make us think! Once we are on the path, he wants us to go within and see and understand for ourselves, so that our faith is not founded solely on intellectual belief or conjecture but upon personal experience and knowledge. It is within ourselves that all questions are answered, that all hypotheses and conjecture translate into known fact. We cannot progress on the path without a good foundation in place. We all know what happens to a structure if the foundations are inadequate. Sooner or later it will fail.

Satsang or the company of truth or good people is important because it is said that ‘Birds of a feather flock together’. If we are in the company of wrong-doers, we  …




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